ट्रक ड्राइवर के बेटे ने दिलाया देश को पदक, गुरुराजा ने रजत पदक जीत रचा इतिहास!

गुरुराजा भी गरीब परिवार से आते हैं। वह ट्रक ड्राइवर के बेटे हैं।
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कॉमनवेल्थ गेम्स में शनिवार को भारतीय वेटलिफ्टर्स का प्रदर्शन कमाल का रहा। 55 किलोग्राम में संकेत सरगर ने सिल्वर दिलाया तो 61 किलोग्राम भारवर्ग में गुरुराजा पुजारी ने ब्रॉन्ज दिलाया। संकेत की तरह ही गुरुराजा भी गरीब परिवार से आते हैं। वह ट्रक ड्राइवर के बेटे हैं। इससे पहले 2018 में गोल्डकोस्ट में पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने 249 किलोग्राम का भार उठाकर सिल्वर मेडल से देश का खाता खोला था। अब बर्मिंघम में उन्होंने देश को दूसरा पदक दिलाया

लंदन. कॉमनवेल्थ गेम्स में शनिवार को भारतीय वेटलिफ्टर्स का प्रदर्शन कमाल का रहा। 55 किलोग्राम में संकेत सरगर ने सिल्वर दिलाया तो 61 किलोग्राम भारवर्ग में गुरुराजा पुजारी ने ब्रॉन्ज दिलाया। संकेत की तरह ही गुरुराजा भी गरीब परिवार से आते हैं। वह ट्रक ड्राइवर के बेटे हैं। इससे पहले 2018 में गोल्डकोस्ट में पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने 249 किलोग्राम का भार उठाकर सिल्वर मेडल से देश का खाता खोला था। अब बर्मिंघम में उन्होंने देश को दूसरा पदक दिलाया। 

गुरुराजा पुजारी ने भारोत्तोलन स्पर्धा के पुरूष 61 किग्रा वर्ग के स्नैच में 118 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 151 किलोग्राम का वजन उठाया और 269 किलोग्राम के साथ तीसरे स्थान पर रहे। मलेशिया के अजनिल बिन ने 285 किलोग्राम का भार उठाया और रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। वहीं पापुआ न्यू गिनी के मोरिया बारू ने 273 किलोग्राम का भार उठाकर सिल्वर मेडल जीता।Gururaja

गुरुराजा के वेटलिफ्टर बनने की कहानी काफी दिलचस्प है। साल 2008 में रेसलर सुशील कुमार ने ओलंपिक पदक जीता तो कर्नाटक के उडीपी जिले के कुंडापुरा गांव के इस लड़के ने कुश्ती में करियर बनाने का मन बनाया। फिर स्कूल में खेल के मास्टर की सलाह पर उन्होंने वेटलिफ्टिंग शुरू की। पांच भाईयों में सबसे छोटे गुरुराज का यहां तक का सफर काफी चुनौती भरा रहा। पिता महाबाला पुजारी की कमाई इतनी नहीं थी कि वह उन्हें अच्छी डाइट दे सक चुनौती से निपटने के लिए गुरुराजा ने सेना में भर्ती होने की कोशिश की, लेकिन यहां भी किस्मत दगा दे गई। कद छोटा होने के कारण ऐसा नहीं हो सका। इसके बाद उन्हें पता चला कि एयरफोर्स में कद के नियम में थोड़ी रियायत है। इससे उन्हें नौकरी मिल गई। गुरुराजा मुश्किलें यहीं कम नहीं हुई। गोल्डकोस्ट में कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले वह चोटिल हो गए। इससे उनकी तैयारियों पर असर पड़ा, लेकिन उन्होंने इसके बाद भी पदक दिलाया। बर्मिंधंम में भी वह पैर की चोट से उबर कर पहुंचे हैं।

चार साल पहले गोल्ड कोस्ट में पदक जीतने से पहले, गुरुराजा ने कहा था कि उन्हें प्रसिद्धि कमाने की लालसा नहीं है। वह अपने परिवार की स्थिति को सुधारना चाहते हैं। उनके घर की हालत ठीक है। 2014 में भारतीय वायुसेना में भर्ती होने के बाद काफी कुछ बदला है। लेकिन वह उसी इलाके में एक बड़ा घर बनाना चाहते हैं, ताकि उनके पिता का संघर्ष खत्म हो और उनके भाई-बहन बेहतर जीवन जी सकें।

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