हिंदी की कविताओं को हरियाणवी में ट्रांसलेट कर वाहवाही बटोर रही है भिवानी की सुनीता करोथवाल

कारोथवाल की "लड़के खड़े रहे" कविता को अब तक देख और सुन चुके है करोड़ों लोग
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सुनीता कारोथवाल
भिवानी की चर्चित साहित्यकार सुनीता करोथवाल ने भिवानी के रहने वाले हिंदी के प्रसिद्ध कवि राजेश्वर वशिष्ठ की चयनित कविताओं का हरियाणवी में भाषांतरण किया है।

भिवानी - भाषाएं साहित्यिक आदान प्रदान से ही विकसित और समृद्ध होती हैं। कोई नदी, बड़ी तब बनती है जो उसमें अनेक छोटी-बड़ी नदियां आकर मिलती हैं। हरियाणा की संस्कृति अति प्राचीन और बहुरंगी है। इस धरती पर प्राचीन काल में श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया तो कालांतर में यहां लखमीचंद जैसे मशहूर सांगी भी हुए। उनकी किस्सागोई भले ही हरियाणवी में थी पर उसमें पूरे भारत की संस्कृति की छाप थी।

सुनीता कारोथवाल

ऐसा ही एक प्रयोग भिवानी की चर्चित साहित्यकार सुनीता करोथवाल ने किया है। उन्होंने हरियाणा, भिवानी के रहने वाले हिंदी के प्रसिद्ध कवि राजेश्वर वशिष्ठ की चयनित कविताओं का हरियाणवी में भाषांतरण किया है।

सूरज की बाट

श्री राजेश्वर वशिष्ठ, हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा सम्मानित साहित्यकार हैं जिनकी कविता और उपन्यास की दर्जन भर से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

सूरज की बाट

सुनीता करोथवाल की अपनी कविता पुस्तक 2021 में प्रकाशित हुई है और इसकी व्यापक प्रशंसा हुई है। इनकी यह अनुवाद की नई पुस्तक बिम्ब प्रतिबिम्ब प्रकाशन से प्रकाशित हो रही है।

सुनीता कारोथवाल

यह पुस्तक अपनी ही धरती से जुड़े अनुभवों को अपनी मातृभाषा में लाने का एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।

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