कोविड वैक्सीनेशन ड्राइव खत्म होते ही लागू होगा CAA! अमित शाह का ऐलान

जल्द लागू होगा CAA कानून, ग्रह मंत्री का ऐलान
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Amit Saha
नागरिकता संशोधन कानून 2019 में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और क्रिस्चन धर्मों के प्रवासियों के लिए नागरिकता के नियम को आसान बनाया गया है। पहले किसी व्यक्ति को भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम पिछले 11 साल से यहां रहना अनिवार्य था। इस नियम को आसान बनाकर नागरिकता हासिल करने की अवधि को एक साल से लेकर 6 साल किया गया है।

दिल्ली. गृह मंत्री  का कहना है कि कोविड 19 वैक्सिनेशन की मुहिम पूरी होते ही नागरिकता संशोधन कानून लागू किया जाएगा। शाह ने ये बात पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी से कही। अधिकारी ने आज केंद्रीय गृह मंत्री से पार्लियामेंट हाउस में एक मुलाकात की थी। वहीं इस बारे में गहन चर्चा की गई। 

शुभेंदु ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के क्रियान्वयन को लेकर मोदी सरकार गंभीर है। उन्होंने शाह से मुलाकात के दौरान बंगाल में बीजेपी और तृणमूल के बीच चल रही रस्साकसी पर भी गहन मंथन किया। अधिकारी का कहना है कि उन्होंने शाह को टीएमसी के 100 ऐसे नेताओं की लिस्ट सौंपी है जिनके खिलाफ करप्शन मामले में कार्रवाई हो सकती है।

अधिकारी का कहना है कि शाह ने उन्हें भरोसा दिया है कि करप्ट नेताओं को उनकी सरकार छोड़ने वाली नहीं है। ध्यान रहे कि प्रिकाशनरी डोज को लेकर केंद्र ने अप्रैल से मुहिम शुरू की थी। इसके अगले नौ माह में पूरा होने की उम्मीद है।

नागरिकता संशोधन कानून 2019 में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और क्रिस्चन धर्मों के प्रवासियों के लिए नागरिकता के नियम को आसान बनाया गया है। पहले किसी व्यक्ति को भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम पिछले 11 साल से यहां रहना अनिवार्य था। इस नियम को आसान बनाकर नागरिकता हासिल करने की अवधि को एक साल से लेकर 6 साल किया गया है।

यानि इन तीनों देशों के ऊपर उल्लिखित छह धर्मों के बीते एक से छह सालों में भारत आकर बसे लोगों को नागरिकता मिल सकेगी। आसान शब्दों में कहा जाए तो भारत के तीन मुस्लिम बहुसंख्यक पड़ोसी देशों से आए गैर मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देने के नियम को आसान बनाया गया है।

नागरिकता कानून, 1955 के मुताबिक अवैध प्रवासियों को भारत की नागरिकता नहीं मिल सकती है। इस कानून के तहत उनलोगों को अवैध प्रवासी माना गया है जो भारत में वैध यात्रा दस्तावेज जैसे पासपोर्ट और वीजा के बगैर घुस आए हों या फिर वैध दस्तावेज के साथ तो भारत में आए हों लेकिन उसमें उल्लिखित अवधि से ज्यादा समय तक यहां रुक जाएं।विपक्ष के विरोध की वजह यह है कि इसमें खासतौर पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया गया है। उनका तर्क है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है जो समानता के अधिकार की बात करता है।

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