यदि कोई व्यक्ति उदार, बौद्धिक और साहसी है तो वह ब्राह्मण है-सुब्रमण्यम स्वामी

स्वामी का कहना था कि जवाहर लाल नेहरू की तुलना में अंबेडकर कहीं ज्यादा बड़े ब्राह्मण थे
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स्वामी
मैसूर के एक इंस्टीट्यूट के 60वें स्थापना दिवस समारोह में उन्होंने कहा कि अंबेडकर के पास विश्व के कई विश्वविद्यालयों की डिग्री थी। उन्होंने सबसे अच्छे संस्थानों से डाक्टरेट की उपाधि हासिल की। वो भारत के संविधान को बनाने वालों में से एक थे। उनका कहना था कि जवाहर लाल नेहरू की तुलना में अंबेडकर कहीं ज्यादा बड़े ब्राह्मण थे, क्योंकि नेहरू ने तो कोई एग्जाम पास ही नहीं किया था। उनका कहना है कि भारत में उत्तर दक्षिण कोई मुद्दा नहीं है। सारे भारतीय हर तरह से एक समान ही हैं।

दिल्ली.  कहने को तो सुब्रमण्यम स्वामी भाजपा नेता हैं। लेकिन वो अपने तीखे तेवरों के लिए ज्यादा जाने जाते हैं। उनकी तपिश से गांधी परिवार के साथ खुद पीएम मोदी भी परेशान हैं। खुद स्वामी कई बार बता चुके हैं कि कैसे सरकार की आलोचना पर पीएमओ की ब्रिगेड उन्हें ट्रोल करती रहती है। उनका कहना है कि ये मोदी भक्त उनकी शैक्षणिक योग्यता के आसपास भी नहीं है। इसी वजह से ये लोग उन पर ठीक तरीके से निशाना भी साध पाते हैं। 

बीजेपी के पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी का कहना है कि सभी भारतीयों का डीएनए एक है। यदि कोई व्यक्ति उदार, बौद्धिक और साहसी है तो वह ब्राह्मण है। उनका कहना है कि भगवद गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने ये ही उपदेश दिया है कि कर्म से ही व्यक्ति की पहचान होती है। वो मानते हैं कि डॉ. अंबेडकर एक ब्राह्मण थे, क्योंकि वो एक महान स्कालर थे। वो उन्हें एससी नहीं मानते।

मैसूर के एक इंस्टीट्यूट के 60वें स्थापना दिवस समारोह में उन्होंने कहा कि अंबेडकर के पास विश्व के कई विश्वविद्यालयों की डिग्री थी। उन्होंने सबसे अच्छे संस्थानों से डाक्टरेट की उपाधि हासिल की। वो भारत के संविधान को बनाने वालों में से एक थे। उनका कहना था कि जवाहर लाल नेहरू की तुलना में अंबेडकर कहीं ज्यादा बड़े ब्राह्मण थे, क्योंकि नेहरू ने तो कोई एग्जाम पास ही नहीं किया था। उनका कहना है कि भारत में उत्तर दक्षिण कोई मुद्दा नहीं है। सारे भारतीय हर तरह से एक समान ही हैं।

यह पहला मौका नहीं है जब सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी ही पार्टी की सरकार पर हमला बोला हो। इससे पहले वो चीन के साथ सीमा विवाद पर भी मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए भारत की विकास दर पर सवाल किया था।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का जिक्र करते हुए कहा कि जिस आईएमएफ के आंकड़े को शेयर करते हुए वित्त मंत्रालय ने एक महीने पहले खुशी जाहिर की थी कि आने वाले वित्तीय वर्ष में विकास दर 8.5 फीसदी होगी, उसी आईएमएफ ने अब इस दर को तेजी से घटाकर पहले 7.4 फीसदी और फिर 6 फीसदी कर दिया है तो अब सरकार क्या कहेगी। वो ब्रिक्स को लेकर भी सरकार की आलोचना कर चुके हैं।

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