‘खतरों को लेकर सतर्क नहीं हुए तो खो देंगे आजादी’, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का बयान

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहाकि, यदि हम भारत के प्रति खतरों को लेकर सतर्क नहीं हुए तो अपनी आजादी खो देंगे.
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स्वतंत्रता दिवस पर मल्लिकार्जुन खड़गे
स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, 'भले मैं शारीरिक रूप से सक्षम नहीं हूं, लेकिन इसके बावजूद इस अवसर पर मैं पूरे देश में होने वाले समारोहों से भावनाओं एवं गर्व के साथ (परोक्ष रूप से) जुड़ा रहूंगा.

नई दिल्ली - भारत स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है. वहीं कोविड संक्रमित होने के चलेत इस बार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे. खड़गे ने रविवार को कहा कि बचपन से ही उन्होंने कभी किसी स्वतंत्रता दिवस समारोह का हिस्सा बनने का मौका नहीं छोड़ा. इस बार वह कोविड-19 से संक्रमित हैं और आइसोलेशन में हैं.

खड़गे ने आगे कहा कि अगर हम अपने देश और समाज के प्रति खतरों को लेकर सतर्क नहीं रहे तो कड़ी मेहनत से पाई गई आजादी, राजनीतिक और सामाजिक आजादी के साथ-साथ नागरिकों के अधिकार भी खत्म हो सकते हैं. इसके साथ ही उन्होंने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि जब भी आवश्यकता हो, संविधान, प्रत्येक नागरिक के अधिकारों और देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए हमेशा खड़े रहें.

स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर खड़गे ने अपने संदेश में कहा, ‘‘पिछले 50 सालों में, मैं स्वतंत्रता दिवस के सरकारी समारोहों का हिस्सा रहा हूं. यह बहुत दुख की बात है कि यह पहला मौका है जब मैं स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं हो पाऊंगा. भले मैं शारीरिक रूप से सक्षम नहीं हूं, लेकिन इसके बावजूद इस अवसर पर मैं पूरे देश में होने वाले समारोहों से भावनाओं एवं गर्व के साथ (परोक्ष रूप से) जुड़ा रहूंगा.’’

खड़गे ने आगे कहा कि, ‘‘75 सालों के बाद भी, मैं अब भी अपनी रगों में महसूस कर सकता हूं और उस अपार रोमांच और गर्व का अनुभव कर सकता हूं जो हम सभी के दिलों में तब उमड़ा होगा, जब भारत ने 15 अगस्त, 1947 की आधी रात को आजादी हासिल की होगी.’’ राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि यह वास्तव में प्रत्येक भारतीय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है.

उन्होंने आगे कहा, ‘‘यह स्वतंत्रता कई महान नेताओं के नेतृत्व में करोड़ों स्वतंत्रता सेनानियों के लंबे और कठिन संघर्ष के कारण संभव हुई थी. यह उनका बलिदान, उनका खून, पसीना ही है और उनके आंसू ही हैं जिसने एक आधुनिक और स्वतंत्र भारत की नींव रखी है.’’ खड़गे ने कहा कि समाज के उत्पीड़ित वर्ग से संबंध रखने वाले उनके जैसे व्यक्ति को भी पांच दशकों तक एक निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में लोगों की सेवा करने का अवसर मिला है. इसका श्रेय भारतीय लोकतंत्र और संविधान की ताकत को जाता है.

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