अरुणाचल के जंगलों में गायब हुए लोगो की खौफनाक दास्तान!

हादसे से जिंदा बचाए गए मजदूरों ने अपनी खौफनाक  दास्तां बताई है
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अरुणाचल
इस हादसे से जिंदा बचाए गए मजदूरों ने अपनी दर्द भरी दास्तां बताई है। बता दें कि लापता होने के दौरान संविदा सड़क निर्माण वर्कर्स ने खुद को जिंदा रखने के लिए केले के तने पर भोजन किया, पेड़ों की जड़ें खाईं। जिंदा बचे लोगों में से एक, जोइनॉर अली ने बताया, “दो दिनों तक हम बिना भोजन के रहे, हम बहुत कमजोर हो गए थे और आगे चल नहीं सकते थे।”

अरुणाचल प्रदेश. भारत-चीन सीमा के साथ अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे जिले में पिछले 15 दिनों से लापता हुए 19 संविदा सड़क निर्माण वर्कर्स की तलाश जारी है। इनमें असम के पांच मजदूरों के शव घने जंगल में मिले हैं। जिसके बाद मरने वालों की संख्या 6 हो गई है। वहीं अब तक दस मजदूरों को बुरी अवस्था में बचाया गया और उनका इलाज चल रहा है। 

इस हादसे से जिंदा बचाए गए मजदूरों ने अपनी दर्द भरी दास्तां बताई है। बता दें कि लापता होने के दौरान संविदा सड़क निर्माण वर्कर्स ने खुद को जिंदा रखने के लिए केले के तने पर भोजन किया, पेड़ों की जड़ें खाईं। जिंदा बचे लोगों में से एक, जोइनॉर अली ने बताया, “दो दिनों तक हम बिना भोजन के रहे, हम बहुत कमजोर हो गए थे और आगे चल नहीं सकते थे।”

अली ने बताया कि दो दिनों के बाद अपनी भूख मिटाने के लिए हमने केले के तने को काटकर उसके अंदरूनी हिस्से को खाया। हमारा स्वास्थ्य बिगड़ रहा था। हमें कच्चे केले और कोई भी फल या पत्ते खाने के लिए मजबूर होना पड़ा। पूरा जंगल कीड़ों से भरा हुआ है। कई दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश ने जंगल में जीवन और हमारे बचने की संभावना को एकदम नर्क जैसा बना दिया। बारिश के कारण हम कई रातों को नहीं सोए।

आप बीती बताते हुए अली ने कहा कि हमें नहीं पता था कि हम कहां थे और कैसे बाहर निकलें। इसकी हमें उम्मीद भी नहीं थी। हमें जंगल में लगभग 17 दिन हो चुके थे जब तक कि स्थानीय लोगों ने हमें ढूंढ़ नहीं लिया और हमें बचाया।

बता दें कि कुरुंग कुमे जिले में पिछले 15 दिनों से सड़क निर्माण स्थल से 19 मजदूर ईद के लिए घर के लिए निकले थे। दरअसल उन्हें घर जाने की छुट्टी नहीं मिली थी लेकिन असम के ये मजदूर पांच जुलाई को भारत-चीन सीमा पर कोलोरियांग के जिला मुख्यालय 200 किलोमीटर दूर दामिन सर्किल में फरार हो गए थे।

ऐसे में ये सभी मजदूर आठ और 11 के दो समूहों निकले। पैदल चलते हुए वे जंगल में लापता हो गए। इनमें से अब तक दस मजदूरों को दयनीय अवस्था में बचाया गया और उनका स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज चल रहा है। वहीं इनमें 6 लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा लापता लोगों में से 10 को बचाया जा चुका है। इनमें खैरुल इस्लाम (26), मजीदुल अली (30), मोनोहर हुसैन (18), इनामुल हुसैन (18), जैनल अली (45), हमीदुल हुसैन, अब्दुल अमीन, इब्राहिम अली, खोलेबुद्दीन शेख (27) और शमीदुल हैं।

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