महाराष्ट्र में सियासी घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा, जानिए अब क्या होगा?

महिला कांग्रेस की अध्यक्ष जया ठाकुर(Jaya Thakur) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर 'दलबदल'(Anti-Defection Law) में शामिल सभी विधायकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है.
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UDDHAV THAKRE
दल-बदल विरोधी कानून(Anti-Defection Law) के प्रावधानों के मुताबिक इस तरह के रेजोल्यूशन पास करने के लिए विधायक दल के दो तिहाई सदस्यों के हस्ताक्षर की जरूरत होती है। यानी एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता चुने जाने के लिए 37 विधायकों का समर्थन चाहिए।

मुंबई: महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट(Maharashtra Political Turmoil) का मामला अब सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) पहुंच गया है। मध्य प्रदेश(Madhya Pradesh Mahila President) में महिला कांग्रेस की अध्यक्ष जया ठाकुर(Jaya Thakur) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर 'दलबदल'(Anti-Defection Law) में शामिल सभी विधायकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

दायर याचिका में कहा गया है कि ऐसे विधायकों को 5 साल तक चुनाव लड़ने से रोकने का निर्देश दिया जाना चाहिए। जया ठाकुर कहा है कि शिवसेना(Shiv Sena) से बागी हुए विधायकों का दलबदल असंवैधानिक(Unconstitutional) है क्योंकि ये दो तिहाई(Two-Third) से कम है।

बता दें कि बुधवार 22 जून को शिवसेना से बागी हुए मंत्री व विधायक एकनाथ शिंदे(Rebel Ekanath Shinde) गुट का एक रेजॉल्यूशन(Resolution) सामने आया। रेजोल्यूशन में एकनाथ शिंदे को शिवसेना के विधायक दल का नेता चुना गया है। इसके साथ ही सुनील प्रभु(Chief Whip Sunil Parbhu) को हटाकर भरत गोगवाले(Bharat Gogwale) को चीफ व्हिप बनाया गया है।

महाराष्ट्र विधानसभा(Maharashtra Legislative Assembly) के 34 विधायकों ने इस रेजॉल्यूशन हस्ताक्षर किये हैं। इस प्रस्ताव को महाराष्ट्र के राज्यपाल और विधानसभा के डिप्टी स्पीकर के पास भेजा गया है। इससे पहले सरकार में बगावत के कारण 21 जून को ही शिवसेना ने शिंदे को विधायक दल के नेता पद से बर्खास्त कर दिया था।

बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना के पास 55 विधायक हैं। दल-बदल विरोधी कानून(Anti-Defection Law) के प्रावधानों के मुताबिक इस तरह के रेजोल्यूशन पास करने के लिए विधायक दल के दो तिहाई सदस्यों के हस्ताक्षर की जरूरत होती है। यानी एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता चुने जाने के लिए 37 विधायकों का समर्थन चाहिए। ऐसे में सिर्फ 34 विधायकों के समर्थन से कोई भी प्रस्ताव पारित करना असंवैधानिक है।

जया ठाकुर ने अपनी याचिका में इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट से दख़ल करने की मांग की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक याचिका में कहा गया है कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद केंद्र सरकार ने दलबदल के मामलों में अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है। इसी का फायदा उठाकर राजनीतिक दल या बागी स्वार्थी विधायक राज्यों में निर्वाचित सरकार को लगातार गिरा रहे हैं।

उद्धव ठाकरे ने बुधवार यानी 22 जून को कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि महाराष्ट्र में सरकार गिर सकती है। इसलिए कहा जा रहा है कि एकनाथ शिंदे के आगे के फैसले काफी अहम होंगे। लेकिन महाराष्ट्र में अब स्थिति राज्यपाल और स्पीकर के हाथ जाती हुई दिख रही है क्योंकि बागी विधायकों की योग्यता या अयोग्यता पर फैसला विधानसभा के स्पीकर(Speaker Of Legislative Assembly) ही ले सकते हैं। अगर शिंदे गुट अपने साथ बागी विधायकों को लेकर इसी तरह रुख इख्तियार किये रहते हैं तो मामला फ्लोर टेस्ट(Floor Test) तक भी पहुंचने की संभावना है।

अमूमन ऐसा देखा जाता है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस तरह की स्थिति आने पर कई मौकों पर अपने फैसले में फ्लोर टेस्ट को बेहतरीन तरीका अपनाती है। जिससे पता चल सके कि किसके पास कितनी संख्या है और कौन सत्ता में काबिज़ होगा। बता दें कि मौजूदा महा विकास अघाडी(MVA) सरकार भी सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद बनी थी।

2019 विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन टूट गया था। इसके बाद शिवसेना ने एनसीपी(Nationalist Congress Party) और कांग्रेस(Congress) के साथ मिलकर महा विकास अघाडी गठबंधन(Maha Vikas Aghadi Alliance) बना लिया। लेकिन महाराष्ट्र के गर्वनर ने बीजपी नेता देवेंद्र फडणवीस को सरकार बनाने का न्योता दिया था।

ऐसे में एनसीपी नेता अजित पवार(Ajit Pawar) ने दावा कर दिया था कि पार्टी विधायक उनके साथ हैं। गर्वनर(Governor Of Maharashtra) के इस फैसले के खिलाफ शिवसेना सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई और फ्लोर टेस्ट की मांग की। कोर्ट में रविवार के दिन विशेष सुनवाई हुई और आदेश दिया गया कि 24 घंटे के भीतर फ्लोर टेस्ट कराया जाए। इसके तीन दिन बाद ही देवेंद्र फडणवीस को इस्तीफा देना पड़ा।

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