भारत के विरोध के बावजूद श्रीलंका पहुंचे चीन व पाकिस्तान के युद्धपोत!

भारत की कड़ी नाराजगी के बावजूद श्रीलंका ने चाइना के जासूसी युद्धपोत को श्रीलंका पहुंचने की अनुमति दे दी है।
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युआन वांग 5 एक शक्तिशाली ट्रैकिंग पोत है जिसकी हवाई पहुंच कथित तौर पर लगभग 750 किमी है। इस रेंज के हिसाब से भारत में केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कई बंदरगाह चीन के रडार पर हो सकते हैं। जहाज के श्रीलंका आने से भारत अपनी चिंताओं को लेकर सतर्क है। दरअसल हंबनटोटा से भारत की दूरी 450 किलोमीटर है। ऐसे में चीन की नापाक चालों को देखते हुए भारत इस जहाज पर लगातार नजर बनाए हुए है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस पोत के चलते दक्षिण भारत में कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की जासूसी किए जाने का खतरा हो सकता है।

कोलंबो. भारत की कड़ी नाराजगी के बावजूद चीन व पाकिस्तान के युद्धपोत श्रीलंका पहुंच चुके हैं। पाकिस्तानी नौसेना का युद्धपत  तैमूर जहां श्रीलंकन नेवी के साथ युद्ध अभ्यास करेगा वही चाइनीस जासूसी युद्धपोत श्रीलंका के तट पर खड़ा होकर हिंद महासागर के समुद्री क्षेत्र की निगरानी करेगा। भारत ने इसे लेकर अपना विरोध भी जताया है। परंतु भारत के विरोध के बावजूद श्रीलंका ने इन दोनों युद्ध पोतों को श्रीलंका पहुंचने की अनुमति दे दी।

हंबनटोटा बंदरगाह पहुंचे चीन के निगरानी जहाज युआनवांग-5 को सूचनाएं हासिल करने के लिए जाना जाता है। इस जहाज के जरिए चीन अपने समुद्री मिशन को सफल बनाने की कोशिशों में हैं। इस जहाज पर सैटेलाइट डिश लगी हुई हैं। इस जहाज की लंबाई करीब 222 मीटर, चौड़ाई 25 मीटर है। आधुनिक उपकरणों से लैस इस जहाज के सहारे चीन अंतरिक्ष में दूसरे देशों के सैटेलाइट की जानकारी भी चुराने की कोशिश करता है। इसे चीन का ताकतवर जासूसी जहाज भी कहा जाता है।Nevy

युआन वांग 5 एक शक्तिशाली ट्रैकिंग पोत है जिसकी हवाई पहुंच कथित तौर पर लगभग 750 किमी है। इस रेंज के हिसाब से भारत में केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कई बंदरगाह चीन के रडार पर हो सकते हैं। जहाज के श्रीलंका आने से भारत अपनी चिंताओं को लेकर सतर्क है। दरअसल हंबनटोटा से भारत की दूरी 450 किलोमीटर है। ऐसे में चीन की नापाक चालों को देखते हुए भारत इस जहाज पर लगातार नजर बनाए हुए है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस पोत के चलते दक्षिण भारत में कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की जासूसी किए जाने का खतरा हो सकता है।

चीन अपने युआनवांग श्रेणी के जहाजों का इस्तेमाल सैटेलाइट, रॉकेट और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) के लॉन्चिंग को ट्रैक करने के लिए करता है। चीन के पास ऐसे सात ट्रैकिंग जहाज हैं, जो पूरे प्रशांत, अटलांटिक और हिंद महासागरों में काम करते हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक इन स्पेस सपोर्ट शिप को पीएलए के एसएसएफ(स्ट्रैटेजिक सपोर्ट फोर्स) द्वारा संचालित किया जाता है। युआन वांग 5 चीन के जियांगन शिपयार्ड में बनाया गया था।

वहीं पाकिस्तान नेवी शिप (PNS) तैमूर कोलंबो के बंदरगाह पर पहुंच गया है और पश्चिमी समुद्र में श्रीलंकाई नौसेना के साथ एक संयुक्त अभ्यास करेगा। न्यूज फर्स्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 134 मीटर लंबे चीनी निर्मित युद्धपोत पीएनएस तैमूर की कमान कैप्टन एम यासिर ताहिर के हाथों में थी और इसे जहाज के पूरक के रूप में 169 द्वारा संचालित किया जाता है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जहाज के 15 अगस्त तक द्वीप में रहने की उम्मीद है और जहाज के चालक दल दोनों नौसेनाओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए श्रीलंका नौसेना द्वारा आयोजित कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, इस साल जून में, चीन ने पाकिस्तान की नौसेना को चार शक्तिशाली टाइप 054A/P युद्धपोतों में से दूसरा जहाज दिया।पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने कहा कि टाइप 054A/Ps न केवल देश की समुद्री सीमा पर पाकिस्तान के समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा वास्तुकला को सुदृढ़ करने का काम करेगा, बल्कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के समुद्री मार्गों की सुरक्षा में भी मदद करेगा।

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